लाला अमरनाथ पूर्व भारतीय कप्तान एवम एक महान क्रिकेट खिलाड़ी

 

लाला अमरनाथ 

           लाला अमरनाथ भारतीय क्रिकेट के गोलापी और अनूठे खिलाड़ियों में से एक थे, जिन्होंने अपने जीवन भर में क्रिकेट जगत को अपनी अनूठी प्रतिभा और संघर्ष से प्रभावित किया। उन्हें उनकी सटीक बैटिंग, धैर्य, और खेल के प्रति अपने समर्पण के लिए याद किया जाता है। लाला अमरनाथ भारतीय क्रिकेट टीम के एक प्रमुख खिलाड़ी थे। लाला अरमरनाथ (नानिक अमरनाथ) का जन्म 11 सितंबर 1911 को कपूरथला, पंजाब में हुआ। 
        वे भारत के पहले आलराउंडर खिलाड़ी थे जो बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों करते थे। वे दाएं हाथ के बल्लेबाज और मध्यम तेज गति के गेंदबाज थे। 
       लाला अमर नाथ भारत की ओर टेस्ट क्रिकेट में शतक लगाने वाले पहले खिलाड़ी थे और ये उनका पहला मैच भी था जिसमे उन्होंने भारत की ओर से एक पारी 21 चोंको की मदद से कुल 118 रन बनाए थे। उन्होंने ये 118 रन 185 मिनट बनाए थे उस समय स्ट्राइक रेट मिनट से ही तय किया जाता था। उस समय तक भारत के किसी भी खिलाड़ी ने अंतराष्ट्रीय शतक नही लगाया था। हालाकि ये मैच भारत हर गया था लेकिन लाला अमरनाथ को उनके प्रदर्शन की खूब बधाईयां मिली। उनके इस प्रदर्शन पर एक महिला ने अपने गहने उतार कर लाला अमरनाथ को भेट कर दिए। तब ये मामला काफी दिनों तक सुर्खियों में रहा था।
     
    लाला अमरनाथ एक ही पारी में 50 रन और 5 विकेट लेने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी थे। वे 2 टेस्ट मैच खेलने के बाद 1934 से 1946 तक टीम से बाहर रहे। उन्होंने 12 साल के बाद टीम में वापसी की। वे इतने लंबे समय अंतराल के बाद वापसी वाले भी पहले खिलाड़ी है। वे 10 या उससे अधिक मैचों में कप्तानी करने वाले भी पहले खिलाड़ी है। वे रणजी ट्राफी में 5 राज्यों के लिए खेलने वाले पहले क्रिकेटर भी है।
          
           उन्होंने फर्स्ट क्लास क्रिकेट के 186 मैचों में 10000 से भी अधिक रन बनाए और 22.98 की औसत से 463 विकेट भी लिए।
            वर्ष 1947-48 में आस्ट्रेलिया के दौरे के साथ स्वतंत्र भारत के पहले कप्तान बने। लाला अमरनाथ ही वो कप्तान थे जिनके नेतृत्व में भारतीय क्रिकेट टीम ने साल 1952 में पाकिस्तान को टेस्ट श्रृंखला में पहली बार शिकस्त दी।1952 में पहली बार 5 टेस्ट मैचों की श्रृंखला खेलने आई पाकिस्तान टीम को भारत ने 2–1 से हराया था।
             
            लाला अमरनाथ ने अपना डेब्यू 15 दिसंबर 1933 को इंग्लैंड के खिलाफ किया। उन्होंने भारत के लिए कुल 24 टेस्ट मैच खेले जिनमें 24.38 की औसत से 878 रन बनाए जिनमें 1 शतक ओर 4 अर्धशतक शामिल थे साथ उन 24 मैचों में उन्होंने 32.91 की औसत से 45 विकेट भी लिए।
           
             लाला को ऐसे क्रिकेटर के रूप में जाना जाता है जिन्होंने भारतीय क्रिकेट में राजसी वर्चस्व को चुनौती दी। इस दिग्गज खिलाड़ी को हालांकि इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ा जब 1936 में इंग्लैंड दौरे के दौरान कप्तान विजियानगरम के महाराज कुमार ने 'अनुशासनहीनता' के कारण उन्हें विवादास्पद तरीके से स्वदेश वापस भेज दिया। लाला और उनके अन्य साथियों ने हालांकि आरोप लगाया कि ऐसा राजनीतिक कारणों से किया गया। इसके बाद लाला को अगला टेस्ट खेलने के लिए 12 बरस का इंतजार करना पड़ा लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और घरेलू क्रिकेट में रनों का अंबार लगाते रहे। अंतत: चयनकर्ताओं को भी उनके आगे झुकना पड़ा और उन्होंने 1946 में इंग्लैंड दौरे के साथ एक बार फिर राष्ट्रीय टीम में वापसी की। हालांकि तब उनकी बल्लेबाजी से ज्यादा धार उनकी गेंदबाजी में थी।
   
           विजय मर्चेट के टीम से हटने पर आस्ट्रेलिया के पहले दौर पर उन्हें भारतीय टीम की कमान सौंपी गई लेकिन उस समय महान बल्लेबाज डान ब्रैडमैन शानदार फार्म में थे जिसके उन्हें कामयाबी नहीं मिल पाई। लाला इस सीरीज के पांच टेस्ट के दौरान नाकाम रहे और 14 की औसत से रन बनाने के अलावा केवल 13 विकेट ही हासिल कर पाए।
            
           उनकी गेंदबाजी तारीफ के काबिल थी। वो उस समय के एक महान गेंदबाज थे। डॉन ब्रैडमैन को हिट विकेट आउट करने वाले लाला एकमात्र गेंदबाज थे।
      
          1951–52 में मद्रास में इंग्लैंड को हराकर पहली बार इंग्लैंड के खिलाफ जीत हासिल की। अमरनाथ इस टीम का हिस्सा थे। किंतु कप्तान नही थे। इस श्रृंखला के बाद लाला अमरनाथ ने भारतीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया।
         अमरनाथ के खेल करियर के बाद उन्होंने भारतीय बोर्ड के मुख्य चयनकर्ता, टीम मैनेजर और ब्रॉडकास्ट जैसी भूमिका भी निभाई। उन्होंने क्रिकेट के क्षेत्र में अपनी योगदान जारी रखा। वे सफल कोच भी रहे और भारतीय क्रिकेट को अपने अनुभव से नवीनतम तकनीकों और रणनीतियों के साथ अवगत कराने में मदद की।
      उनकी ही तरह उनके बेटों सुरेंद्र अमरनाथ, मोहिंदर अमरनाथ और राजेंद्र अमरनाथ ने भी भारतीय क्रिकेट में अहम योगदान दिया। सुरेंद्र ने भी अपने पिता की तरह डेब्यू मैच में शतक जमाया जबकि मोहिंदर ने भारत के लिए 69 टेस्ट खेले।
        
              1991 में भारत सरकार ने उनके भारतीय क्रिकेट में अहम योगदान के लिए पद्म भूषण से भी सम्मानित किया। लाला अमरनाथ का 5 अगस्त 2000 को 88 बरस की उम्र में दिल्ली में निधन हुआ। तब भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने शोक संदेश में उन्हें भारतीय क्रिकेट का आइकन करार दिया था।
           लाला अमरनाथ ने भारतीय क्रिकेट को अपने समर्पण और निष्ठा से सजीव किया। उनकी क्रिकेट में अनूठी भूमिका और उनका योगदान भारतीय क्रिकेट के स्वर्णिम इतिहास में सदैव अमर रहेगा.........
   
       





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