विजय हजारे पूर्व भारतीय कप्तान
विजय हजारे का पूरा नाम विजय सैमुअल हजारे था। उनका जन्म 11 मार्च 1915 को मुंबई में हुआ।उन्होंने सांगली के प्रेस्बिटेरियन मिशन इंडस्ट्रियल स्कूल में शिक्षा प्राप्त की, और एक बहुत ही धार्मिक ईसाई थे।उन्होंने विश्व क्रिकेट में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
विजय हजारे एक ऑलराउंडर थे। वे दाएं हाथ के बल्लेबाज और दाएं हाथ से मध्यम गति से बॉलिंग करते थे।
विजय हज़ारे ने भारत की ओर से क्रिकेट खेला और उन्होंने भारत के लिए 30 टेस्ट मैच खेले। विजय हजारे ने अपना अंतर्राष्ट्रीय टेस्ट डेब्यू 22 जून 1946 को इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स के एतिहासिक मैदान में किया और उन्होंने अपनी पहली ही पारी में 65 रन बनाए और उन्होंने 2 विकेट भी लिए।
उन्होंने अपने 30 टेस्ट मैचों में 47.65 के औसत से 2192 रन बनाये जिसमें 7 शतक और 9 शतक शामिल थे। उन्होंने कुल 2840 गेंदें फेंककर कुल 20 विकेट हासिल किए। उनका सबसे बड़ा स्कोर 164 रन था।
विजय हज़ारे 1951 से 1953 तक भारत के कप्तान भी रहे। डेथ कैप्टन ने 14 टेस्ट मैच खेले। 1960 में भारत सरकार में पद्म श्री से भी सम्मानित किया गया। उनके सम्मान में घरेलू टूर्नामेंट में विजय हजारे ट्रॉफी भी दर्ज की गई है।
वे पहले भारतीय बल्लेबाज थे जिन्होंने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में हरा शतक लगाया था और वो पहले भारतीय बल्लेबाज थे द टेस्ट क्रिकेट के दो हिस्सों में शतक लगाए थे। 23 जनवरी 1948 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एडिलेड में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले गए टेस्ट मैच में यह उपलब्धि हासिल की और हासिल की। दोनों पारियों में 116 रन और 145 रन बने।
उन्होंने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में कुल 238 मैचों में 58.38 के औसत से 18740 रन बनाये, उनका उच्चतम स्कोर 316 रन था।
अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद उन्होंने भारतीय क्रिकेट टेस्ट टीम के संयुक्त चयनकर्ता का काम भी किया। 28 मार्च 1953 को किंग्स्टन में वेस्ट इंडीज के खिलाफ विजय हजारे ने अपना अंतिम टेस्ट खेला था। इस मैच में विजय हजारे ने 28 रन बनाए। लंबे समय तक कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़ने के बाद 18 दिसंबर 2004 को बड़ोदरा में उनका देहांत हो गया। परंतु उनका नाम सदा सदा के लिए अमर हो गया।
विजय हजारे का नाम क्रिकेट इतिहास में हमेशा आदर से लिया जायेगा। वे क्रिकेट जगत में विजय हजारे का नाम एक बहुत बड़ी प्रेरणा रहेगा।

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